भक्ति: आत्मा का परमात्मा से मिलन

​भक्ति का अर्थ केवल मंदिर जाना या माला जपना नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक अर्थ है—'पूर्ण समर्पण'। जब हम अपने अहंकार को छोड़कर उस परम शक्ति पर विश्वास करने लगते हैं, वही भक्ति की शुरुआत है।

​भक्ति के तीन मुख्य स्तंभ

​भक्ति मार्ग के लाभ

निष्कर्ष:

भक्ति वह सेतु है जो हमें संसार के दुखों से पार ले जाकर आनंद की अनुभूति कराता है। बस एक कदम बढ़ाकर देखिए, ईश्वर आपकी ओर दस कदम बढ़ाएंगे।